radha-krishna bhajan - radhe tere charano ki gar dhool jo mil jaaye





Radhe radhe sabko,

I want to share one radha rani bhajan with you all:


राधे तेरे चरणों की, गर धूल जो मिल जाए,
सच कहती हूँ मेरी तकदीर बदल जाये ।

ये मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा भजन करूं,
जितना इसे समझाऊ उतना ही मचल जाए ।
राधे तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए...

राधे मेरे जीवन की, बस एक तमन्ना है,
जब अंत समय आये, तुम सामने हो मेरे ।
राधे तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए...

English:
Radhe, i wish for the poor dust of your feet
Truly, it will change my destiny.

my mind is very playful, how i chant your name,
harder i try to explain it, that much it yearns.
Radhe, i wish for the poor dust of your feet..

Radhe, in my life, there is just one wish,
when my final time comes, you should be in front of me.
Radhe, i wish for the poor dust of your feet...


radhe charan



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sweet bhajan - teri ankhiyan hai jaadu bhari - krishna bhajan





This is a very sweet bhajan, i want to share with you all.

तेरी अँखियाँ है जादू भरी,
बिहारी मैं तो कब से खड़ी।

१. सुनलो मेरे श्याम सलोना, तुमने ही मुझ पर कर दिया टोना,
मैं तो तेरे ही द्वारे पड़ी, बिहारी मैं तो कब से खड़ी ।

२. तुमसा ठाकुर और ना पाया, तुमसे ही मैंने नेहा लगाया,
मेरी अँखियाँ तुम्ही से लड़ी, बिहारी मैं तो कब से खड़ी ।

जा रहे हो मथुरा, एक कृपा तो करते जाना...
३. कृपा करो हरिदास के स्वामी, बांके बिहारी , अन्तर्यामी,
मेरी टूटे ना भजन की लड़ी, बिहारी मैं तो कब से खड़ी ।
तेरी अँखियाँ है जादू भरी...

English:
O Bihari ji, your eyes are filled with magic,
i am waiting for you for a long time!!!

1. listen my shyam, you have done some kind of magic on me,
i am standing before you, waiting for you..

2.i didn't find thakur(God) like you, i have loved only you,
my eyes are only on you, waiting for you.

Now you are going to Mathura, do one favour to me...
3. O baanke bihari, Owner of Haridas,
 My bhajan streak shouldn't break, i am waiting for you..





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(Hindi font)Relationship between aatma and param-atma






सतगुरु-ईश्वर का दर्द है ..

एक बूँद ..जो सागर का अंश थी ! एक बार हवा के
संग बादलोँ तक पहुँच गई । इतनी ऊँचाई पाकर उसे
बड़ा अच्छा लगा । अब उसे सागर के आँचल मेँ कितने
ही दोष नज़र आने लगे।

लेकिन अचानक .
एक दिन बादल ने उसे ज़मीन पर
एक गंदे नाले मेँ पटक दिया । एकाएक उसके सारे
सपने, सारे अरमां चकनाचूर हो गए ।
ये एक बार नहीँ अनेकोँ बार हुआ । वो बारिश बन
नीचे आती, फिर सूर्य की किरणेँ उसे बादल तक
पहुँचा देती ।

अब उसे अपने सागर की बहुत याद आने लगी । उससे
मिलने को वो बेचैन हो गई ; बहुत तड़पी, बहुत
तड़पी .. ..।

फिर ..एक दिन सौभाग्यवश एक नदी के आँचल मेँ
जा गिरी । उस नदी ने अपनी बहती रहनुमाई मेँ
उसे सागर तक पहुँचा दिया।

सागर को सामने देख बूँद बोली -
हे मेरे पनाहगार सागर !
मैँ शर्मसार हूँ ।
अपने किये कि सज़ा भोग चुकी हूँ । आपसे बिछुड़ कर मैँ एक पल भी शांत ना रह पाई ।
दिन-रैन दर्द भरे आँसू बहाए हैँ ;
अब बस इतनी प्रार्थना है कि आप मुझे अपने पवित्र आँचल मेँ समेट लो !

सागर बोला - बूँद ! तुझे पता है तेरे बिन मैँ
कितना तड़पा हूँ ! तुझे तो दुःख सहकर एहसास हुआ
। लेकिन मैँ ..मैँ तो उसी वक्त से तड़प रहा हूँ जब तूने
पहली बार हवा का संग किया था ; तभी से
तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ ।...और जानती है उस
नदी को मैँने ही तेरे पास भेजा था । अब आ !
आजा मेरे आँचल मेँ !
..बूँद आगे बढ़ी और सागर मेँ समा गई । बूँद सागर
बन गई।
...
ये बूँद कोई और नहीँ ; हम सब ही वो बूँदेँ हैँ,
जो अपने आधारभूत सागर उस परमात्मा से बिछुड़
गई हैँ। इसलिए ना जाने कितने जन्मोँ से भटक रहे
हैँ।
और वो ईश्वर ना जाने कब से हमसे मिलने को तड़प
रहा है । उनका वो दर्द , वो तड़प ही "पूर्ण
सद्गुरु" के रुप मेँ इस धरती पर बार-बार अवतरित
होता है ।हमेँ उनसे मिलाने के लिए ही ।
लेकिन पता नहीँ उनकी तड़प को हम कब समझेँगे ।

जय जय श्री राधे कृष्‍णा


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(Hindi font)story of shaitaan and sant






एक बार की बात है एक संत कहीं जा रहे थे , उन्हे
रास्ते में एक व्यक्ति पांच गधों पर सामान ले
जाता हुआ मिला ।
संत ने पूंछा - भाई तुम कौन हो ?
व्यक्ति - व्यापारी हूं
संत - किस चीज का व्यापार करते हो ?
व्यक्ति - ये गधों में जो सामान लदा है उनका
संत - क्या लदा है ?
व्यक्ति - पहले गधे में अत्याचार , दूसरे में अहंकार ,
तीसरे में ईर्ष्या , चौथे में
बेईमानी , पांचवे में छल कपट लदा है ।
संत - इन्हे भला कौन खरीदता है ?
व्यक्ति - अत्याचार सत्ताधारी खरीदते हैं ,
अहंकार सांसारिक लोगों की पसंद है ,
विद्वानों को ईर्ष्या चाहिये ,
बेईमानी व्यापारी वर्ग लेते हैं और छल - कपट
महिलाओं को कुछ अधिक ही पसंद है ... और
मेरा नाम तो आपने सुना ही होगा मुझे शैतान कहते
हैं , सारी मानव जाति भगवान
की नहीं मेरी प्रतीक्षा करती हैं , मेरे व्यापार में
लाभ ही लाभ है ।
संत - पर तुम जा कहां रहे हो ?
व्यक्ति - खरीददारों की तलाश में ... इतना कह
कर व्यक्ति चला गया ।
वह व्यापारी आज भी ग्राहकों की तलाश में घूम
रहा है ...
सावधान रहें उसके ग्राहक न बनें !
जय जय श्री राधे कृष्णा


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