Showing posts with label sant. Show all posts
Showing posts with label sant. Show all posts

(Hindi font)story of shaitaan and sant






एक बार की बात है एक संत कहीं जा रहे थे , उन्हे
रास्ते में एक व्यक्ति पांच गधों पर सामान ले
जाता हुआ मिला ।
संत ने पूंछा - भाई तुम कौन हो ?
व्यक्ति - व्यापारी हूं
संत - किस चीज का व्यापार करते हो ?
व्यक्ति - ये गधों में जो सामान लदा है उनका
संत - क्या लदा है ?
व्यक्ति - पहले गधे में अत्याचार , दूसरे में अहंकार ,
तीसरे में ईर्ष्या , चौथे में
बेईमानी , पांचवे में छल कपट लदा है ।
संत - इन्हे भला कौन खरीदता है ?
व्यक्ति - अत्याचार सत्ताधारी खरीदते हैं ,
अहंकार सांसारिक लोगों की पसंद है ,
विद्वानों को ईर्ष्या चाहिये ,
बेईमानी व्यापारी वर्ग लेते हैं और छल - कपट
महिलाओं को कुछ अधिक ही पसंद है ... और
मेरा नाम तो आपने सुना ही होगा मुझे शैतान कहते
हैं , सारी मानव जाति भगवान
की नहीं मेरी प्रतीक्षा करती हैं , मेरे व्यापार में
लाभ ही लाभ है ।
संत - पर तुम जा कहां रहे हो ?
व्यक्ति - खरीददारों की तलाश में ... इतना कह
कर व्यक्ति चला गया ।
वह व्यापारी आज भी ग्राहकों की तलाश में घूम
रहा है ...
सावधान रहें उसके ग्राहक न बनें !
जय जय श्री राधे कृष्णा


Share: