Ram krishna bhajan - this is how our senses should be(by Gaurav Krishna Goswami ji)





Ram Krishna bhajan


This is how our senses should be:

चाहे लख लख बात बनाईये , मुख सोना(beautiful) नही लगदा राम बिना ।
चाहे लख लख बात बनाईये , मुख सोना नही लगदा श्याम बिना ।
(chahe lakh lakh baat banaiye, mukh sona nahi lagda raam bina)

अंख सोनी नहीं प्रभु दे दर्श बिना, 
चाहे लख लख काजल पाईये , मुख सोना नही लगदा राम बिना...

कान सोने नही प्रभु की कथा बिना,
चाहे लख लख कुण्डला पाईये, मुख सोना नही लगदा राम बिना...

काया सोनी नही लगदी भजन बिना,
चाहे मल मल रोज़ नहाइए, मुख सोना नही लगदा राम बिना...

पग सोने नही वृन्दावन जाए बिना,
चाहे जग सारा  घूम आईये,  मुख सोना नही लगदा राम बिना...


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