Kabir Das Ke Dohe - 1






Parnaari ki rachnao, jo lehasun ki khani
Khoone besir khaiy, pragat hoye deewani
परनारी का राचणौ, जिसकी लहसण की खानि ।
खूणैं बेसिर खाइय, परगट होइ दिवानि ॥
A desire for other's wife is like a mine of garlic. A person can eat garlic hiding from all. But the fact of his having consumed garlic is clear to anyone who meets him
परनारी का साथ लहसुन खाने के जैसा है, भले ही कोई किसी कोने में छिपकर खाये, वह अपनी बास से प्रकट हो जाता है ।
भगति बिगाड़ी कामियाँ, इन्द्री केरै स्वादि ।


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